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अंतागढ़ क्षेत्र वासियों में रेल सेवा शुरू होने से खुशी, तो वहीं सीधे राजधानी तक  रेल सेवा नहीं होने से थोड़ी मायूसी भी

अंतागढ़ क्षेत्र वासियों में रेल सेवा शुरू होने से खुशी, तो वहीं सीधे राजधानी तक रेल सेवा नहीं होने से थोड़ी मायूसी भी

 

संतोष बाजपेयी ब्यूरो प्रमुख कांकेर- लंबे इंतजार के बाद आखिरकार अंतागढ़ वासियों को रेल की सौगात मिल ही गई। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के बाद यहां रेल की शुरुआत हुई है। बता दें कि रायपुर से केवटी तक रेल सेवा पहले से ही चालू थी, जिसका विस्तार अंतागढ़ तक किया गया है। अंतागढ़ तक रेल सेवा की शुरुआत वर्ष 2019 में ही होने वाली थी, परन्तु कोरोना के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया था।

अंतागढ़ तक रेल सेवा प्रारम्भ होने के बाद अब इस लाइन के आगे विस्तार कर जगदलपुर तक अतिशीघ्र बढ़ाए जाने की संभावना बढ़ गई है। बता दें कि 40 से 50 वर्ष पूर्व जब से रावघाट में बेहतरीन क्वालिटी के विशाल लौह अयस्क भंडार होने की पुष्टि हुई थी, उसके बाद ही यह कयास लगाए जा रहे थे, कि इसके परिवहन के लिए इस क्षेत्र में रेल सेवा का चालू होना जरूरी था। उसके बाद आधी सदी बीत जाने पर अंततः यह सम्भव हो गया है। रेल सेवा की शुरुआत पर क्षेत्र वासियों में भारी उत्साह दिखा। अंतागढ़ व क्षेत्र के लोग भारी संख्या में इस मौके पर मौजूद थे।

रेल सेवा का उद्घाटन सांसद मोहन मण्डावी ने हरी झंडी दिखा कर किया। इस अवसर पर विधायक अनूप नाग, पूर्व सांसद विक्रम उसेंडी सहित कई अन्य जनप्रतिनिधी व रेलवे के अधिकारी भी अवस्थित थे। इन सभी जन प्रतिनिधियों ने इस ऐतिहासिक अवसर पर अंतागढ़ से भानुप्रतापपुर तक का सफर ट्रेन के माध्यम से किया। अतिथियों के लिए रेलवे के द्वारा भानुप्रतापपुर में भी लंच की व्यवस्था की गई थी।


रायपुर तक नहीं मिली सीधी ट्रेन

अंतागढ़ क्षेत्र वासियों में जहां रेल सेवा शुरू होने की खुशी है, वहीं सीधे राजधानी तक सीधी रेल नहीं होने से थोड़ी मायूसी भी है। लोगों ने कहा कि रायपुर तक सीधी सेवा होने पर खुशी दुगुनी हो जाती।

नक्सल गढ़ में दौड़ेगी ट्रेन

अंतागढ़ क्षेत्र लगभग 3 दशकों से नक्सलियों के प्रभाव में रहा हुआ क्षेत्र है कभी यह धुर नक्सल क्षेत्र के नाम से जाना जाता था परंतु इस पूरे इलाके में सुरक्षाबलों की तैनाती के बाद नक्सली गतिविधियों में काफी कमी आई है रेलवे के संचालन शुरू होने के बाद इन गतिविधियों में और कमी आने की संभावना है।

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