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घिसट घिसट कर चल रहा परदेशी राम की ज़िंदगी, शासन की योजनाओं नही मिल रहा लाभ

घिसट घिसट कर चल रहा परदेशी राम की ज़िंदगी, शासन की योजनाओं नही मिल रहा लाभ

 

 संतोष बाजपेयी ब्यूरो प्रमुख कांकेर- कांकेर जिला भानुप्रतापपुर तहसील के अंतर्गत आने ग्राम पंचायत घोठा में पैंसठ वर्षीय बुजुर्ग घिसट घिसट कर अपना जीवन बिताने पर मजबूर है।  यह बात केवल मुहावरे के तौर पर नहीं कही जा रही है, अपितु सच मे ऐसा घटित हो रहा है। मामला भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत घोठा के ऊपरपारा का है, जहां के निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग परदेशी राम कुमेटी पिछले 5 वर्षो से दोनों पैरों के नाकाम होने की वजह से हाथ के सहारे ही चलते फिरते है, 5 वर्ष पूर्व किसी बीमारी की वजह से परदेशी की यह हालत हुई है।  शासन की ओर विकलांगो के लिए कई योजना चलाई जा रही है, परन्तु इन सब योजनाओ से परदेशी राम पुर्णतः वंचित है। उन्हें इन योजनाओं से कोई सहायता नहीं मिल पा रही है। लाचार बुजुर्ग परदेशी ने बताया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व उन्होंने ग्राम पंचायत के माध्यम से ट्रायसिकल के लिए आवेदन किया था, पर आज तक उनके आवेदन पर कार्यवाही नही की गई और उन्हें ट्रायसिकल नहीं मिला है। 

बुजुर्ग ने आगे बताया कि दोनो पैरों से लाचार होने की वजह से काम नही कर पाता हूं। अब लोगों की सहायता पर निर्भर होना मेरी मजबूरी है। मेरे घर का कनेक्शन बिजली विभाग द्वारा लगभग एक वर्ष पूर्व काट दिया गया है, अब लालटेन के सहारे रात गुजारना पड़ता है। दिव्यांगों को मुफ्त बिजली देने का  सरकार का वादा भी धरातल पर नजर नहीं आ रहा है।

विदित हो कि बुजुर्ग परदेशी राम का कोई सगा सम्बन्धी नहीं है। बुजुर्ग ने शादी भी नहीं की है और अकेले ही रहते हैं। ऐसे में दोनों पैरों के काम करना बंद कर देने से वह कहीं आ जा पाने में लाचार हो गए हैं। ऐसे में कोई काम कर पाना तो असम्भव ही है। बुजुर्ग के समक्ष जीवन यापन का प्रश्न उठ खड़ा हुआ है। ग्राम सरपंच रामप्रसाद कावड़े के द्वारा कुछ राशन बुजुर्ग के घर भिजवा दिया जाता है जिससे बुजुर्ग को दो वक्त का खाना नसीब हो पाता है। 

बुजुर्ग परदेसी राम ने बताया कि उन्हें पहले वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी, परंतु उसके लिए स्वयं कार्यालय तक जाना पड़ता है, जो कि वह लाचारी के चलते नहीं जा पाते हैं। जिसके कारण लगभग पिछले 1 वर्ष से उन्हें पेंशन भी नहीं मिल पा रही है। 

 वृद्ध परदेसी राम के अनुसार यदि उन्हें ट्राईसाईकिल मिल जाए तो वह अपना काफी काम उसी के सहारे कर सकते हैं, और उन्हें अधिक मदद की आवश्यकता भी नहीं  होगी। लगभग 3 वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत के माध्यम से ट्राईसाईकिल के लिए दिए गए आवेदन का क्या हुआ इसके बारे में भी परदेसी राम को कुछ पता नहीं है, खुद से कहीं आ जा पाने  में लाचार परदेसी राम अपने लिए दौड़ भाग नहीं कर पाते हैं और इसी के कारण सारी सरकारी योजनाओं से उन्हें वंचित रहना पड़ रहा है परदेसी राम ने शासन प्रशासन के नुमाइंदों से अपील की है कि वे आगे बढ़कर उनकी सहायता करें और ट्रायसिकल, मुफ्त बिजली, पेंशन आदि शासकीय योजनाओं का लाभ दिलवाए।

रामप्रसाद कावड़े सरपंच के कथनानुसार..... परदेसी राम ने मेरा कार्यकाल प्रारंभ होने से पहले ट्राईसाईकिल के लिए आवेदन दिया था जिसकी जानकारी मुझे नहीं थीअब आप के माध्यम से जानकारी हुई है तो तत्काल इसके लिए प्रयास करूंगा वैसे प्रदेशी राम को राशन पहुंचा कर उसकी मदद की जा रही है।

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