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भागों भागों महिला कमांडो आ गई, यहा महिला कमांडो से खौफ खाते है गुंडे बदमाश

भागों भागों महिला कमांडो आ गई, यहा महिला कमांडो से खौफ खाते है गुंडे बदमाश

 

लीलाधर निर्मलकर स्वतंत्र पत्रकार MPCG-    यदा यदा ही धर्मस्य, ग्लानिर्भवति भारत |

                                                                        अभ्युत्थानम् धर्मस्य, तदात्मनं सृजाम्यहम् ||   

यह कथन द्वापर युग की महाभारत काल में अर्जुन को श्री कृष्ण ने कहा था कि  जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं प्रकट होता हूँ । आज कलयुग में  नारी शक्ति के रूप में प्रकट हुई है जो आज समाज में फैली कई सामाजिक बुराईयों की इस महायुद्ध में स्वंम ही कृष्णा और स्वंम ही अर्जुन की भूमिका निभा कर सामाजिक बुराईयों को दूर करने के लिए महिला कमांडो कार्य कर रही है ।

महिलाओं की इसी निस्वार्थभाव सेवा ने इस गीता की श्लोगन को महिलाएं चरितार्थ कर रही है । आज समाज में फैली बुराईयों जैसे शराबखोरी , जुआ , महिलाओ पर अत्याचार जैसे  सामाजिक बुराईयों पर अंकुश लगाने में शासन प्रशासन की पसीने छूट जाते है तो वही महिला कमांडो जब महरूम कलर साड़ी सर में टोपी लिए गांव की गली में दस्तक देती है तो शराबी , जुआड़ी  बदमाशों की शामत जैसे आ जाती है । 


बालोद जिलामुख्यालय से लगी ग्राम शिवनी सहित जिला के लगभग सैकड़ों गांवों के महिला कमांडो अपनी पूरी पोषाक पहने गांव में निकलते ही गांव की स्वच्छता और अनुशासन बनाने की कार्य करती है । जिसके परिणामस्वरूप गांव में पहले की अपेक्षा अब  बहुत से परिवर्तन दिखती है गांव के गली नुक्कड़ में बैठे शराबी जुआड़ी महिला कमांडो की सीटी की आवाज सुनते ही फरार हो जाते है । छत्तीसगढ़ में 14 जिलों में कुछ 65 हजार महिलाएं इस सुधार कार्य से जुड़े है । जिसकी संस्थापक शमशाद बेगम है जो लगतार 16 सालों से महिला कमांडो को लीड कर रही है । जहां शासन प्रशासन समाज में बढ़ रही अपराधो को रोकने में नतमस्तक हो जाते है तो वहीं महिला कमांडो गांधी नीति तरीके से सुधार कर रही है ।

कौन है पद्मश्री शमशाद बेगम

पद्मश्री शमशाद बेगम बालोद जिला के गुण्डरदेही ब्लॉक की रहने वाली हैं जो सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करती है । पद्मश्री शमशाद बेगम कई लोगो की तीखी टिप्पणी ताने सुनने के बावजूद 2006 में 100 महिलाओ की टीम गठित कर महिला कमांडो बनाई थीं जो की साधारण परिवार की गृहणी होती है जो अपनी घर की कामकाज खत्म कर के रोज शाम को 2 से 3 घंटा गांव की गली मोहल्ले में मेहरून कलर की साड़ी टोपी पहन कर लाठी डंडों के साथ सीटी बजाते निकलती है ।

इसी के परिणामस्वरूप आज की स्थिति में पूरे छत्तीसगढ़ में 14 जिलों से 65 हजार महिलाएं फ्री में अपनी सेवाएं दे रही है । इस महिला कमांडो में ज्यादातर लोग विवाहित होती है जिसकी उम्र 20 वर्ष से 60 वर्ष तक की होती है । शमशाद बेगम को इस कार्य के लिए कई सम्मान समारोह में सैकड़ों अवार्ड भी नवाजी गई और  2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया । 

  

शमशाद बेगम ने बताया कि लगभग दो सौ महिला कमांडो को स्थानीय पुलिस ने सुपर पुलिस अधिकारी (एसपीओ) के रूप में वर्गीकृत किया है। यह एसपीओ पुलिस के साथ मिलकर कानून और व्यवस्था की स्थिति पर नजर रख रही हैं। वह बताती हैं कि राज्य के 14 अन्य जिलों में लगभग 65 हजार महिला कमांडो हैं। और वह भी अपने-अपने क्षेत्रों में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी अहम भूमिका निभाई हैं।

 शमशाद बेगम ने बताया कि समिति ने अब तक जिला प्रशासन द्वारा स्थापित अनाज बैंक में 10 क्विंटल से अधिक चावल का योगदान दिया है। वहीं प्रत्येक गांव में पांच हजार से 10 हजार रुपए तक एकत्र कर गरीबों को राहत पहुंचाई ।

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