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धान के बदलें रागी फसल की बिक्री से अधिक आय प्राप्त होने पर किसानो में खुशी लहर, कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर में 38 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से रागी की खरीदी

धान के बदलें रागी फसल की बिक्री से अधिक आय प्राप्त होने पर किसानो में खुशी लहर, कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर में 38 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से रागी की खरीदी

 

दीपक पुड़ो ब्यूरो प्रमुख छत्तीसगढ़- भानुप्रतापपुर विकासखंड के ग्राम जामपारा, सेलगांव के किसान को इन दिनों धान के बदले में रागी की फसल रास आ रही है, किसान लंबे समय से खरीफ एवं रबी में एक ही फसल धान की ही खेती करते आ रहे थे। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसानो को गर्मी धान के स्थान पर रागी मड़िया की खेती करने की सलाह दी गई, नए फसल के रूप में रागी को अपनाने और पहली बार रागी की खेती को लेकर किसानो में धान की तुलना में उत्पादन को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी प्रवीण कवाची ने किसानो को धान के जगह लाभकारी रागी फसल की खेती करने के लिए प्रेरित किया जामपारा के किसान ने नए फसल को अपनाने से पहले ट्रायल के रूप में अपनी थोड़ी से भूमि में पहली बार रागी की बुवाई की रागी फसल की अच्छी पैदावार होने से किसानों को अब भरोसा होने लगा धान के स्थान पर अगर रागी की खेती करें तो कम लागत कम पानी, कम खर्च में दो गुना लाभ कमा सकते हैं।

जामपारा के किसान कोमल यादव ने बताया कि कृषि विभाग के सलाह पर ही उन्होंने पहली बार प्रयोगिक रूप में मात्र 20 डिसमिल जमीन में रागी फसल लगाया था जिससे 4 क्विंटल 50 किलो उपज प्राप्त हुआ कृषि विभाग के माध्यम से ही उपज को कांकेर कृषि विज्ञान केंद्र के लघु धान्य प्रोसेसिंग यूनिट में 38 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री करने की जानकारी दी गई। किसान कोमल ने बताया कि महज 20 डिसमिल भूमि से रागी फसल की बिक्री से 17 हजार से अधिक की आमदनी प्राप्त हुई, किसान ने आगे बताया कि अगर मैंने एक एकड़ में रागी की बुवाई की होती तो 20 क्विंटल से अधिक उपज मिलता जिससे मुझे 76 हजार से अधिक की आमदनी होती, जो धान के तुलना में दो गुना अधिक लाभ मिलता।

जामपारा के ही किसान पवन साहू ने भी पहली बार धान के स्थान पर रागी लगाने के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि रागी  की खेती में खाद, दवा पानी की मात्रा भी कम लगती है, शासन द्वारा अच्छे दाम पर बिक्री की भी व्यवस्था की गई है। जिले के अन्य किसानो को भी लाभकारी फसलो की खेती के लिए आगे आना चाहिए, किसान पवन साहू ने बताया कि रागी के हारवेस्टिंग के उपरांत धान, मक्का की तरह रागी मिंजाई मशीन भी उपलब्ध हो जाने से और भी किसान भाई रागी फसल लगाने में आगे आएंगे।

इसी प्रकार सेलगांव के किसान बंशी साहू ने भी 532 क्विंटल रागी 20 हजार 02 सौ रुपए का कृषि विज्ञान केंद्र में बिक्री किया। कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी प्रवीण कवाची ने जानकारी दी रागी की खेती में लागत के एवज में 70 से 80 प्रतिशत तक आय प्राप्त होती है, जो धान की खेती के तुलना में कही ज्यादा अधिक है, खरीफ फसल में रागी बीज उत्पादन के तहत किसानों द्वारा बीज प्रक्रिया केंद्र बीज निगम से रागी का पंजीयन कर रागी फसल को 57 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री कर सकते है। मिलेट मिशन के तहत राज्य सरकार द्वारा लघु धान्य के फसलो को बढ़ावा देने किसानो को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानो को खरीफ सीजन में राजीव गांधी किसान न्याय योजना अंतर्गत धान के बदले अन्य फसले जैसे- सुगन्धित धान, जिंक धान, रागी कोदो, कुटकी, मक्का, दलहन, तिलहन की खेती के लिए 10 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दिया जा रहा है। साथ ही टिकरा भूमि में भी इन फसलो की खेती पर 09 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। किसानो को इन फसलो की खेती के लिए लेम्पसों तथा बैकांे से ऋण मुहैया भी  कराई जा रही है। राज्य शासन द्वारा रागी, कोदो, कुटकी फसलो की बिक्री में किसी प्रकार का दिक्कत न हो इसके लिए प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति, कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर में खरीदी की व्यवस्था व प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई है। रागी में पोषण व स्वास्थ्य के लिए सेहदमंद विकल्प होने के कारण वैश्विक बाजार में मिलेट्स का डिमांड अधिक है, वेल्यूएडिशन के माध्यम से रागी उत्पादन करने वाले किसानो को भी लाभ मिलेगा।

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