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 मुठभेड़ में शहीद जवान का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ शव का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया गया, इस दौरान सैकड़ों लोगों ने शहीद जवान को दी श्रद्घांजलि

मुठभेड़ में शहीद जवान का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ शव का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में किया गया, इस दौरान सैकड़ों लोगों ने शहीद जवान को दी श्रद्घांजलि

संतोष बाजपेयी ब्यूरो प्रमुख कांकेर- जिला नारायणपुर एवं दंतेवाड़ा के सीमावर्ती क्षेत्र तुलारगुफा और मंगारी के मध्य पुलिस पार्टी और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुआ। जिसमे  डीआरजी नारायणपुर के हेड कांस्टेबल सालिक राम मरकाम शहीद हुए,शहीद जवान ग्राम चवेला भानुप्रतापपुर के निवासी है। यह खबर मिलते ही अंचल में शोक की लहर दौड़ गई। ना केवल शहीद के घर अपितु पूरे क्षेत्र  मे मातम छा गया। शहीद जवान के दो छोटे छोटे बच्चे है,जिन्हे ये भी मालूम नहीं है कि उनकी कितनी बड़ी क्षति हुई है।


गुरुवार को सुबह लगभग 10:00 बजे शहीद को गार्ड आफ ऑनर दिया गया इस दौरान विधायक मनोज मंडावी सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए इसके अलावा प्रशासन की तरफ से जिले के सभी आला अधिकारी भी जिसमें जिला कलेक्टर व एसपी अंतिम विदाई में शामिल हुए।
ग्राम चवेला निवासी मृतक के बड़े भैया अलखराम ने बताया शहीद जवान सालिक राम एक सप्ताह पूर्व ही अपने निवास स्थान चवेला घर आया था और अपनी बुजुर्ग माता जी से कहा था कि अगली बार मै एक माह की छुट्टी लेकर जल्दी गांव आऊंगा फिर मिलकर यहां पर नया मकान बनाएंगे और आज उनकी मौत की खबर आ गई। शहिद सालिकराम की स्कूली शिक्षा ग्राम चवेला व कालेज की पढ़ाई भानुप्रतापपुर में हुई है। परिवार मे एक ही सालिकराम सर्विस में था बाकी सभी खेती किसानी व मजदूरी से जीवनयापन करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए शहीद जवान आवश्यकता अनुसार रकम भेजता था।

जवान का विवाह वर्ष 2013 में हुआ था विवाह के कुछ दिन बाद ही उनका नारायणपुर जिले में पुलिस विभाग में सर्विस लग गया था,तब से वह अपने परिवार पत्नी यशोदा मरकाम व दो बच्चे टाइगर व भुअन के साथ वही रहता था। बुजुर्ग मां बुधिया बाई एवं भाई पतिराम व बड़े भैया अलखराम मरकाम गांव में रहते है।

बुजुर्ग माँ का रो रोकर बुरा हाल- बुधवार दोपहर को बेटा की मौत की खबर सुनते ही बेटा को याद करते माँ घंटो रोती रही परिजन व आस-पास की महिलाएं व लोग एकत्रित होकर संतावना देते रहे। गांव सहित अंचल में शोक की लहर दौड़ गई।

पिता का सहारा छीना- शहीद सालिकराम के बचपन मे ही उनके पिताजी की मृत्यु हो गई थी, जिससे उनके व परिवार का जीवनयापन कठिन दौर से बीता, अब उनके बच्चों के साथ ही वही स्थिति निर्मित हो गई है। उनके बड़ा लड़का 05 एवं छोटा ढेड़ वर्ष का है। अब बच्चों की परवरिश की चिंता भी मंडराने लगी है।


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